हिंदू धर्म में मोक्ष की अवधारणा

लेखक

  • Dr Sita Kumari ##default.groups.name.author##

##semicolon##

मोक्ष,  संसार ,  कर्म,   ब्रह्म , अद्वैत , और आनंद ।

सार

हिंदू धर्म में मोक्ष को जीवन का परम लक्ष्य माना गया है, जो जन्म-मरण के चक्र  से मुक्ति प्राप्त करने की अवस्था है। यह आत्मा की अंतिम मुक्ति है, जहाँ व्यक्ति सांसारिक बंधनों से मुक्त होकर परमात्मा या ब्रह्म के साथ एकत्व प्राप्त करता है। विभिन्न दर्शनों में मोक्ष को अलग-अलग रूपों में परिभाषित किया गया है—अद्वैत वेदांत में इसे आत्मा और ब्रह्म की एकता, द्वैत वेदांत में भगवद-भक्ति द्वारा ईश्वर की शरणागति, और सांख्य तथा योग दर्शन में इसे पुरुष और प्रकृति के अलगाव के रूप में देखा जाता है।मोक्ष प्राप्ति के मार्ग भी विविध हैं, जिनमें ज्ञान योग, भक्ति योग, कर्म योग, और राज योग प्रमुख हैं। हिंदू धर्मग्रंथों—उपनिषदों, भगवद गीता, वेदों और पुराणों में मोक्ष की व्याख्या विस्तार से की गई है।अतः, मोक्ष केवल आध्यात्मिक मुक्ति ही नहीं, बल्कि मानसिक और नैतिक उत्थान का भी प्रतीक है, जो व्यक्ति को पूर्ण शांति और आनंद की ओर ले जाता है।                                                                   

   मोक्ष,  संसार ,  कर्म,   ब्रह्म , अद्वैत , और आनंद ।

##submission.authorBiography##

  • Dr Sita Kumari

    AssistantProfessor  , Dept. of Philosophy,YBN University Ranchi

##submission.citations##

प्रकाशित

2026-05-11